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इलेक्ट्रानिक हार्डवेयर की योजनाएं एवं नीतियां
नीतियां योजनाएं
औद्योगिक अनुमोदन नीति
औद्योगिक अनुमोदन नीति की प्रमुख विशेषताओं में निम्नपलिखित बातें शामिल हैं:
- इलेक्ट्रा निक एयरोस्पेइस और रक्षा उपस्कनर विनिर्माण को छोड़कर इलेक्ट्रा निक्सा एवं सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र औद्योगिक लाइसेंसिंग को मूलत: समाप्त कर दिया गया है।
- इलेक्ट्रा निक्सर एवं सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए कोई आरक्षण नहीं है और इसके हर क्षेत्र में निजी क्षेत्र द्वारा निवेश का स्वाषगत है।
- इलेक्ट्रा निक्सी एवं सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग देश में कहीं भी स्थाथपित किया जा सकता है बशर्ते कि उसे पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिम्मेिदार प्राधिकारी से और स्थाीनीय जोनिंग और भू-उपयोग विनियमों के तहत स्वी्कृति मिल जाए।
- बड़े उद्योग (जहां प्लांइट एवं मशीनरी में 10 करोड़ रुपये से भी अधिक का निवेश किया जाता है) और जिन्हेंा लाइसेंस प्राप्तन करने की छूट होती है, को केवल औद्योगिक उद्यमियों के लिए ज्ञापन (आईईएम) में विनिर्दिष्टर सूचना औद्योगिक सहायता सचिवालय (एसआईए), औद्योगिक नीतियां एवं संवर्धन विभाग, वाणिज्यत एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार को देना एवं उसकी पावती प्राप्तो करना आवश्यगक है। वाणिज्यीक उत्पा्दन प्रारम्भक होने के तुरन्त, पश्चाकत आईईएम के भाग ख द्वारा वांछित सूचना दी जानी चाहिए। इसके लिए आगामी कोई भी अनुमोदन लेना आवश्यगक नहीं है। निर्धारित कार्य औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग वाणिज्यआ एवं उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट (http://dipp.gov.in) से डाउन लोड किया जा सकता है।
- लघु उद्योग (जहां प्लां ट एवं मशीनरी में 25 लाख से अधिक किन्तुी 5 करोड़ से कम राशि का निवेश किया जाता है) और मध्यिम उद्योग (जहां प्लां ट एवं मशीनरी पर 5 करोड़ से अधिक किन्तुक 10 करोड़ से कम राशि का निवेश किया जाता है) के लिए केवल जिला उद्योग केन्द्रई (डीआईसी) में पंजीकरण कराना आवश्यिक है।
विदेशी निवेश नीति
भारत इलेक्ट्रननिक्स एवं सूचना औद्योगिकी क्षेत्र में निवेशकों का स्वा गत करता है। भारत सरकार निवेशकों को मित्रवत प्लेतटफार्म उपलब्ध कराने के लिए नीतियों एवं प्रक्रियाओं में बेहतर पारदर्शिता लाने के लिए प्रयासरत है।
कोई भी विदेशी कम्परनी भारत में अपना परिचालन शुरू कर सकती है। इसके लिए उसे कम्प नी अधिनियम 1956 के तहत अपनी कम्पभनी का पंजीयन कराने की आवश्यसकता है। ऐसी भारतीय कम्पपनियों में विदेशी इक्विीटी 100 प्रतिशत तक हो सकती है। पंजीकरण कराते समय यह आवश्यऐक है कि कम्पधनी के मालिक के पास परियोजना के विविरण, स्थाोनीय भागीदार (यदि कोई है), कम्पपनी की अवसंरचना, इसका प्रबंधन ढांचा और शेयरधारण की प्रक्रिया आदि से संबंधित ब्यौारे होने चाहिए।
किसी संयुक्त उद्यम को भारतीय भागीदार के स्थातपित सम्पोर्कों, वित्तीरय सहायता और वितरण सम्बवन्धीस विपणन नेटवर्क का भरपूर लाभ मिलता है। विदेशी निवेश का अनुमोदन या तो स्व।चालित मार्ग से प्राप्तप किया जाता है अथवा सरकारी अनुमोदन प्राप्त। किया जाता है ।
भारत सरकार प्रत्यजक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) द्वारा निवेश के साथ-साथ विदेशी निगमति निकायों (ओसीबी), जो पहले से उनके स्वाीमित्वर में थे, को तमाम तरह की सुविधाएं प्रदान करती है ताकि उन्हेंो घरेलू निवेश के क्षेत्र में आकृष्टे किया जा सके। विदेशी प्रौद्योगिकी को एफडीआई एवं विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग करार दोनों के माध्य्म से बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रत्य्क्ष विदेशी निवेश और विदेशी प्रौद्योगिकी सहयोग करारों को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को प्रत्य यायोजित शक्तिदयों के तहत स्वगचालित ढंग से अनुमोदित किया जा सकता है अथवा भारत सरकार द्वारा अन्यशथा इतर ढंग से इसे अनुमोदित किया जा सकता है।
स्वाचालित अनुमोदन
सेवा क्षेत्र सहित ज्यायदातर क्षेत्रों में पूर्व अनुमोदन के बिना विदेशी/ एनआरआई निवेशक से स्वाचालित मार्ग के तहत 100 प्रतिशत तक के प्रत्यनक्ष पूंजीनिवेश की अनुमति है। स्वएचालित मार्ग के तहत आने वाले क्षेत्रों/कार्यकलापों में प्रत्याक्ष पूंजी निवेश (एफडीआई) के लिए न तो सरकार अथवा भारतीय रिवर्ज बैंक किसी से भी पूर्व अनुमोदन प्राप्तो करने की आवश्यषकता नहीं है। (विवरण के लिए कृपया भारतीय रिजर्व बैंक की वेबसाइट http://www.rbi.org.in का संदर्भ लें। सरकार की प्रत्यएक्ष पूंजी निवेश व्य वस्थाt को पुन: उदार बनाने की प्रतिबद्धता के अनुक्रम में निम्न लिखित को छोड़कर अन्यी सभी आइटम/ कार्यकलापों को प्रत्यदक्ष पूंजी निवेश (एफडीआई)/एनआरआई और ओसीबी के लिए स्वइचालित मार्ग के अंतर्गत रखा गया है:
- ऐसे सभी प्रस्ताशव, जिनके लिए एक औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यतकता होती है, जिसमें निम्नसलिखित शामिल हैं:
- ऐसे आइटम, जिनके लिए औद्योगिक (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1951 के तहत एक औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यजकता है।
- लघु उद्योगों के लिए आरक्षित आइटमों का विनिर्माण करने वाली यूनिटों की इक्विचटी पूंजी में विदेशी निवेश 24 प्रतिशत से अधिक होने पर।
- सरकार द्वारा 1991 की नई औद्योगिक नीति के तहत अधिसूचित स्था न संबंधी नीति के संदर्भ में औद्योगिक लाइसेंस की आवश्यककता वाले सभी आइटम।
- ऐसे सभी प्रस्ताधव जिनमें विदेशी भागीदार का भारत में पहले से कोई उद्यम है। उसने भारत में किसी के साथ इस संबंध में करार किया हो।
- ऐसे सभी प्रस्ताअव जो किसी मौजूदा भारतीय कम्पीनी के शेयरों का विदेशी/एनआरआई/ओसीबी निवेशक के पक्ष में अधिग्रहण से संबंधित हो।
- ऐसे सभी प्रस्ताीव जो अधिसूचित क्षेत्रीय नीति/ कैम्पोंऔ के अंतर्गत नहीं आते हैं अथवा ऐसे क्षेत्रों के अंतर्गत नहीं आते हैं जिनमें प्रत्येक्ष पूंजी निवेश की अनुमति नहीं है और/अथवा जब कोई निवेशक एफआईपीबी को आवेदन करने के विकल्पय का चयन करता है और वह स्वकचालित मार्ग की सुविधा का लाभ नहीं उठाता है।
सरकारी अनुमोदन प्राप्त् करने की प्रक्रिया – एफआईपीबी
सरकारी अनुमोदन की आवश्याकता वाले विदेशी निवेश के लिए प्रस्तुभत किए गए सभी प्रस्तागवों पर विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) द्वारा विचार किया जाता है। विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड विदेशी निवेश/विदेशी तकनीकी सहयोग से संबंधित समेकित अनुमोदन भी प्रदान करता है। एनआरआई निवेश और 100 प्रतिशत निर्यात उन्मुकख यूनिटों (ईओयू) से इतर प्रत्य क्ष पूंजी निवेश के लिए अनुमोदन प्राप्त0 करने हेतु आवेदन पत्र एफसीआईएल प्रपत्र में आर्थिक कार्य विभाग (डीईए), वित्त मंत्रालय को प्रस्तुएत किए जाने चाहिए। प्रत्य क्ष पूंजी निवेश संबंधी दिशा निर्देशों के विवरणों के लिए कृपया औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग की वेबसाइट http://dipp.gov.in का संदर्भ लें
राजकोषीय नीति
इलेक्ट्रा निक्सप हार्डवेयर क्षेत्र के लिए यथा लागू राजकोषीय नीति की प्रमुख विशेषताएं निम्नाकनुसार हैं:
- सीमा शुल्कर की अधिकतम दर 10 प्रतिशत है। 217 सूचना प्रौद्योगिकी करार (आईटीए-1) आइटमों पर सीमा शुल्कक शून्यक प्रतिशत है। इस करार के तहत मुख्यक रूप से निम्न लिखित वर्गों के उत्पाशद और कम्पूनियां आती हैं: कम्यूमुख टर और सहायक उपकरण, दूर संचार उपस्कंर, सेमीकंडक्ट्र, सेमीकंडक्ट्र विनिर्माण उपस्कटर, साफ्टवेयर और वैज्ञानिक उपकरणों सहित इलेक्ट्राानिक घटक।
- आईटीए-1 आइटमों के विनिर्माण के लिए आवश्यलक सभी माल (वस्तु ओं) को वास्तटविक प्रयोगकर्ता स्थि1ति के अध्यनधीन सीमा शुल्कस से छूट प्रदान की गई है।
- इलेक्ट्रा निक घटकों और आप्टिकल फाइबर तथा केबलों के विनिर्माण के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले विनिर्दिष्टि पूंजीगत कच्चाि माल (वस्तुबओं) इनपुटर पर सीमा शुल्क शून्या प्रतिशत है।
- इलेक्ट्राषनिक्सज सामान के विनिर्माण के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले विनिर्दिष्ट पूंजीगत माल पर सीमा शुल्का शून्य् प्रतिशत है।
- एलसीडी पैनलों और सेटटाप बाक्सज पर सीमा शुल्के 5 प्रतिशत है।
- सेलुलर फोन सहित मोबाइल हैंडसेट के कलपुर्जों, घटकों और सहायक उपकरणों पर आधारभूत सीमा शुल्कल और उत्पारदक शुल्कि/सीवीडी हटा दी गई है। अर्थात इन आइटमों पर उपर्युक्ती शुल्क् की छूट है।
- मोबाइल फोन और सहायक उपकरणों के विनिर्माण के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले कल पुर्जों पर 4 प्रतिशत की विशेष सीवीडी की पूरी छूट को एक वर्ष अर्थात 6.7.2010 तक के लिए फिर से लागू कर दिया गया है।
- उत्पाद शुल्कय (सीईएनवीएटी) की औसत दर 8 प्रतिशत है।
- माइक्रो प्रोसेसर, हार्ड डिस्कव ड्राइव, फ्लापी डिस्क ड्राइव, सीडी रोम ड्राइव, डीवीडी ड्राइव/ डीवीडी राइटर, फ्लैश मेमोरी और काम्बो ड्राइवों पर उत्पाफद शुल्क में छूट दी गई है।
- सूचना प्रौद्योगिकी आइटमों पर मूल्यम वर्धित कर (वैट) 4 प्रतिशत की दर से लगाया जाता है और गैर-सूचना प्रौद्योगिकी आइटमों पर इसकी दर 12.5 प्रतिशत है। सीएसटी 2 प्रतिशत है।
विदेशी व्यारपार नीति
- रक्षा संबंधी कुछ आइटमों को छोड़कर सामान्य:त: सभी इलेक्ट्रा निक्सन एवं सूचना प्रौद्योगिकी उत्पाकदों का मुक्त़ रूप से आयात किया जा सकता है। एक छोटी नकारात्मेक सूची जिसमें हाई पावर माइक्रोवेव ट्यूब, हाई इंड सुपर कम्यूिय टर और डेटा संसाधन सुरक्षा उपस्कर जैसे आइटम शामिल हैं, को छोड़कर सामान्यंत: सभी इलेक्ट्रा निक्सध एवं सूचना प्रौद्योगिकी उत्पासदों का निर्यात किया जा सकता है।
- पुराने पूंजीगत माल का मुक्ता रूप से आयात किया जा सकता है।
- जीरो ड्यूटी एक्सकपोर्ट प्रोमोशन कैपिटल गुड्स स्कीवम (ईपीसीजी) जो शून्य प्रतिशत की दर से सीमा शुल्क् पर पूंजीगत माल के आयात की अनुमति प्रदान करती है, वह सुविधा इलेक्ट्राीनिक उत्पाशदों के निर्यातकों के लिए भी उपलब्धप है। ईपीसीजी योजना के अंतर्गत निर्यात संबंधी बाध्यशता को भी सूचना प्रौद्योगिकी करार (आईटीए-1) आइटम की डीटीए को आपूर्ति करके भी पूरा किया जा सकता है बशर्ते कि उसकी स्वी कृति मुक्तए विदेशी विनिमय के अंतर्गत प्राप्तत की गई हो।
- निर्यात उद्देश्यों के लिए बाधा रहित विनिर्माण एवं व्यारपार को सक्षम बनाने की दृष्टिी से विशेष आर्थिक जोन (एसईजेड) की स्था पना की जा रही है। घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) से विशेष आर्थिक जोन को की जाने वाली बिक्री को भौतिक निर्यात माना जा रहा है। इससे घरेलू आपूर्तिकर्ता डीईपीबी लाभों को वापस लेने, सीएसटी में छूट प्राप्तर करने और सेवा कर में छूट प्राप्तज करने के लिए पात्र हो जाते हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी करार (आईटीए-1) में विनिर्दिष्टी आइटमों और शून्य शुल्क अधिसूचित टेलीकाम/ इलेक्ट्रा निक आइटमों की घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) में आपूर्ति करने वाले आपूर्तियों को ईओयू/ईएचटीपी/एसटीपी/एसईजेड यूनिटों के तहत गिना जाता है। इनकी गणना निवल विदेशी निवेश अर्जन (एनएफई) की पूर्ति के उद्देश्य से की जाती है।
- निजी कम्यूस् टरों/लैपटाप और रिफर्बिष्ड किए गए/पुन: विनिर्मित किए गए कलपुर्जों सहित पुराने कम्यूिजी टरों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया है। परन्तुद प्रिंटर, प्लॉटर, स्कैुनर, मानीटर, की-बोर्ड और भंडारण यूनिटों सहित पुराने कम्यू प् टरों, लैपटाप और कम्यूी रों के सहायक उपकरणों का आयात मुक्तर रूप से किया जा सकता है बशर्ते कि वे निम्न्लिखित श्रेणी के आदाताओं द्वारा दान एवं उपहार में दिए गए हों। इस प्रकार का आयात इस शर्त के अध्युधीन किया जा सकता है कि ऐसे माल अथवा वस्तुगओं का प्रयोग कभी वाणिज्यि्क उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा और न ही ये वस्तुाएं हस्तांंतरित की जा सकेंगी:
- केंद्रीय अथवा राज्य् सरकार या किसी स्थारनीय निकाय द्वारा संचालित स्कूयल
- किसी भी संगठन द्वारा गैर-वाणिज्यिक आधार पर संचालित किए जाने वाले तकनीकी संस्थाीन
- पंजीकृत धर्मार्थ चिकित्सासलय
- सार्वजनिक पुस्तथकालय
- सार्वजनिक वित्तीतय सहायता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास स्थावपना
- केंद्रीय सरकार अथवा राज्यर सरकार या स्थाएनीय निकायों द्वारा संचालित सामुदायिक सूचना केंद्र
- केंद्र अथवा राज्यव सरकार या स्था नीय निकाय द्वारा संचालित युवा शिक्षा केंद्र
- केंद्र, राज्यथ सरकार या किसी संघ राज्यत क्षेत्र का कोई संगठन
भारत की विदेश व्या पार नीति और प्रक्रियाओं से संबंधित जानकारी वाणिज्य विभाग, वाणिज्यि एवं उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट (http://commerce.nic.in) पर उपलब्धज है।

