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ई-बुनियादी ढांचा(अवसंरचना)
प्रस्तावना
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (सीआईटी) के साथ-साथ इंटरनेट ने विशाल मात्रा में उपलब्ध जानकारी, ज्ञान तथा सूचना के आदान-प्रदान को संभव बनाया है और समग्र आर्थिक-सामाजिक विकास एवं वृद्धि में यह अहम भूमिका निभा रहे हैं। सूचना एवं प्रबुद्ध ज्ञान व जानकारी वाले समाज के लिए ई-बुनियादी ढांचा सरलतम ढंग से उपलब्ध करना इनकी मुख्य प्रधानता है। ई-बुनियादी ढांचे में प्रगतिशील सहयोग और विभिन्न प्रौद्योगिकियों के समेकन के लिए उपकरण, सुविधाएं तथा संसाधन शामिल हैं। जैसे इंटरनेट ब्रॉडबैंड चैनल, कंप्यूटिंग पावर, बैंडवीथ प्रावधान, डाटा स्टोरेज, ग्रिड आधारित संसाधनों का आदान-प्रदान आदि। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) की टिकाऊ एवं कारगर वृद्धि तथा उच्च प्रतिस्पर्धी बाजार की अगुआई में वैश्वीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए गुणवत्तायुक्त बुनियादी ढांचे में निवेश वृद्धि, अनुसंधान एवं विकास प्रयासों को बढ़ावा देने, संचार, इंटरनेट तथा ब्रॉडबैंड प्रौद्योगिकियों में बौद्धिक संपदा के सृजन तथा संबंधित नीतिगत मुद्दों पर नियमित रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है।
इस क्षेत्र में सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की कुछ पहलों में निम्नलिखित पहलें शामिल है :
बायो- आईआईटी पार्क की स्थापना
ई-बुनियादी ढांचा प्रभाग देश में जैव-सूचना प्रौद्योगिकी (बायो-आईटी) से संबंधित कार्यकलापों को बढ़ावा देने, बायो-आईटी क्षेत्र में सुयोग्य प्रोफेशनल जनशक्ति तैयार करने, बायो-आईटी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के साथ जानकारी का आदान-प्रदान करने से संबंधित कार्यों में प्रयास कर रहा है। अब तक सिर्फ दो राज्यों अर्थात कर्नाटक और तमिलनाडु ने ही बायो-आईटी सुविधा स्थापित करने में अपनी रूचि दिखाई है। बंगलुरू में बायो-आईटी सुविधा स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। एक बार बंगलुरू में बायो-आईटी सुविधा स्थापित होने और परिचालित होने के बाद भारत में बायो-आईटी अनुसंधान बुनियादी ढांचे के प्रचार-प्रसार के लिए और अधिक राज्यों/संघ राज्योंा से भी प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे।
सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर)
सूचना प्रौद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर) योजना को भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित किया गया है। इसके तहत आईटी/बीपीओ क्षेत्र की व़द्धि को सरल बनाने के लिए भारत के प्रत्येक राज्य में एकीकृत टाउनशिप स्थाषपित की जाएगी, जिससे भारत में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ सुनहरे उद्योग जगत का उदय होगा।
पारगमन यूरोप-एशिया सूचना नेटवर्क – चरण 3 (टीईआईएन 3) यूरोपियन यूनियन सहयोग के तहत
दो अनुसंधान प्रबुद्ध समुदायों के बीच विश्वसनीय तथा कुशलतम संंपर्क स्थाेपित करने के लिए ई.आर.एन.ई.टी. तथा डिलीवरी ऑफ एडवांस नेटवर्क टैक्नोलॉजी टू यूरोप लिमिटेड (डीएएनटीई) के बीच सहयोग के माध्यिम से ई.आर.एन.ई.टी इंडिया को यूरोपियन रिसर्च नेटवर्क यूरोप में जीईएएनटी नेटवर्क के साथ जोड़ने के लिए सूचना सोसायटी प्रौद्योगिकी (आईएसटी) कार्यक्रम पर भारत-यूरोपियन यूनियन सहयोग समझौते के तहत पारगमन यूरोप-एशिया सूचना नेटवर्क चरण-3 (टीईआईएन 3) स्थापित किया गया ताकि अनेक तरह के नेटवर्क संसाधनों का आपस में आदान-प्रदान किया जा सके। विभिन्न शैक्षणिक तथा अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के बीच अनुसंधान संबंधी सूचना के आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा सूचना प्रौद्योगिकी, जीवन विज्ञान, जीनोमिक, जैवप्रौद्योगिकी, सामग्री विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान आदि के क्षेत्र में साझेदारी करने के लिए अगस्त, 2006 से 45 एमबीपीएस कनेक्टिविटी की बैंडवीथ को परिचालित किया गया है। इस परियोजना में भारत मुख्य लाभार्थी और साझेदार है। इसमें इसकी मुख्य लागत तथा इस्तेमाल के प्रभार की लागत की पूर्ति हेतु 80 प्रतिशत योगदान यूरोपियन कमीशन द्वारा तथा शेष 20 प्रतिशत योगदान दक्षिण पूर्व एशिया के प्रतिभागी देशों द्वारा दिया जाएगा। भारत को यूरोप के साथ-साथ सिंगापुर हब से 2.5 जीबीपीएस के सुरक्षित सम्पर्क से जोड़ने के लिए अगले 2 वर्ष की अवधि के दौरान भारत के कुल आकलित योगदान की राशि लगभग 22.0 करोड़ होगी।
भारत की सहभागिता को इस नेटवर्क के प्रयोग तथा इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा इसके उन्नयन के संदर्भ में जब कभी जरूरी होगा नियमित रूप से और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में विकलांग बच्चों में दक्षता निर्माण हेतु आईसीटी वोकेशनल केंद्र
प्रथम चरण में विकलांगता से ग्रस्त बच्चों के प्रशिक्षण के लिए 20 आईसीटी वोकेशनल केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में कमजोर व विकलांग बच्चों को आईसीटी दक्षता में कुशलतम बनाया गया जिससे वह रोजगार प्राप्त करने तथा अपनी जीविका के लिए आय सृजन में सक्षम बन सकें। विद्यालय में मौजूद बुनियादी ढांचे को वर्ल्ड वाइड वैब (www) से जोड़ने के लिए लोकल एरिया नेटवर्क (एलएएन) तथा इंटरनेट से जोड़ा गया। दूसरे चरण में देश के विभिन्न हिस्सों में 100 आईसीटी वोकेशनल केंद्र खोलने तथा प्रथम चरण में स्थापित केंद्रों के रखरखाव के लिए परियोजना आरंभ की गई। राज्य/संघ राज्य के साथ परामर्श से 50 आईसीटी केंद्रों की पहचान की गई है और ईआरएनईटी इंडिया के द्वारा इनके कार्यान्वयन का कार्य चल रहा है।
मार्च 2010 तक शेष बचे 50 आईसीटी वोकेशनल केंद्रों को स्थापित कर लिया जाएगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को योजना संचालित करने का अनुरोध किया गया है।
मंदबुद्धि बच्चों के लिए आईसीटी आधारित दूरवर्ती प्रशिक्षण सुविधा स्थापित की गई
मंदबुद्धि बच्चों के विशेष शिक्षाविद, अभिभावकों तथा शिक्षकों के लिए दूरवर्ती प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए ई-बुनियादी ढांचा प्रभाग द्वारा निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ एक परियोजना आरंभ की गई है :
- विशेष शिक्षा के क्षेत्र में ईडीयूएसएटी दक्षिण फुटप्रिंट के क्षेत्र में तथा पुनर्वास विशेषज्ञों को दूरवर्ती प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचे की सुविधा प्रदान करना।
- अलग-अलग तरीके से सक्षम व्यक्तियों के अभिभावकों के लिए नवोन्मेषी कार्यक्रम तैयार तथा कार्यान्वित करना और मंदबुद्धि तथा अन्य प्रकार की विकलांगता से ग्रस्त बच्चों के कार्यक्रम तैयार करने की प्रक्रिया में आईसीटी के इस्तेमाल को आरंभ करना।
- परियोजना में 3 वर्ष की अवधि के दौरान 442.72 लाख रुपये के कुल बजट परिव्यय से केरल, तमिल नाडु तथा कर्नाटक राज्यों में चयनित विशेष/एसएसए विद्यालय तथा संगठनों में 20 सैटलाइट इंटरएक्टिव टर्मिनल (एसआईटी) तथा 80 रिसीव ओनली टर्मिनल (आरओटी) स्थापित करने का प्रस्ताव है।
एसआईटी तथा आरओटी के लिए उपस्कर प्राप्त होने के बाद प्रशिक्षण कार्य आरंभ करने के लिए इनका इंस्टालेशन प्रारंभ किया जाएगा।
अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई में जानकारी डाटा केंद्र का सृजन (केडीसी)
परियोजना में तमिल नाडु के छात्रों तथा समुदाय के लिए ई-शिक्षा, डिजिटल पुस्तकालय तथा प्रौद्योगिकी संसाधन केंद्र जैसी सुविधाएं प्रदान करने के लिए जानकारी डाटा केंद्र स्थापित किया जाएगा। यह परियोजना अपने कार्यान्वयन के आरंभिक चरण में है। अन्ना विश्वविद्यालय ने परियोजना को तीव्र गति से कार्यान्वित करने के लिए सन माइक्रोसिस्टम के साथ सहयोग किया है। प्रथम चरण में 50,000/100,000 छात्रों तथा शैक्षणिक विषय-वस्तु की पहुंच/उपलब्धचता के लिए बुनियादी ढांचा तथा वैब आधारित विषय वस्तु तैयार की जाएगी तथा इसके बाद छात्रों तथा समाज के लोगों के लिए सहयोगी ई-विषय वस्तु पाठ्यक्रम जोड़ने के लिए संसाधन प्रदान किए जाएंगे।
सम्पर्क अधिकारी
डॉ गोविंद
वैज्ञानिक जी
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
इलेक्ट्रॉनिक्स निकेतन, 6, सीजीओ काम्प्लैक्स
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