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आईटी सॉफ्टवेयर, सेवाएँ और बीपीओ
सूचना प्रौद्योगिकी से गीगाबिट्स की गति से सूचना प्राप्त। करना संभव हुआ है। इससे न केवल राष्ट्रों के बीच परस्पर और अधिक संचार संभव हुआ है बल्कि इसके कारण लाखों गरीबों, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले सीमांत स्तर के लोगों और दूर-दराज के क्षेत्रों में बसने वालों के जीवन पर भी बहुत सकारात्मक प्रभाव पडा़ है। इंटरनेट से क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं जैसे कि इसके द्वारा आयकर के रिटर्न की ई-फाइलिंग संभव हुई है तथा पासपोर्टों के लिए ऑन-लाइन आवेदन किया जा सकता है या रेलवे के टिकट इंटरनेट से बुक कराए जा सकते हैं।
आज देश की सूचना प्रौद्योगिकी क्षमता में अपार वृद्धि हुई है और हम वैश्विक प्रतिस्पर्धा, स्वस्थ जीडीपी की ओर बढ़ रहे हैं, प्रतिरक्षा संबंधी हमारी क्षमताओं में सुधार हुआ है और हम ऊर्जा एवं पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हुए हैं।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी – सूचना प्रौद्योगिकी – सहायी सेवा (आईटी-आईटीईएस) उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था को चलाने वाले एक प्रमुख बल की भूमिका निभा रहा है। सेवा, सॉफ्टवेयर निर्यात तथा बीपीओ क्षेत्र में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों से आईटी एवं आईटीईएस उद्योग का विकास अत्यधिक तीव्र गति से हो रहा है। इन उपलब्धियों के कुछ संकेतों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। आईटी/आईटीईएस निर्यात वर्ष 2008-09 में 46.3 बिलियन अमेरिकी डालर तक पहुंच गया, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में वर्तमान में प्रत्यक्ष रूप से 2.2 मिलियन व्यवसायविदों को रोजगार मिला हुआ है तथा 8 मिलियन अन्य लोग परोक्ष रूप से इस उद्योग से रोजगार प्राप्तज कर रहे हैं जो सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी का 5 प्रतिशत से अधिक है। फॉर्चून 500 तथा ग्लोबल 2000 जैसे कार्पोरेशन भारत से आईटी/आईटीईएस की सोर्सिंग कर रहे हैं और यह वैश्विक सोर्सिंग का प्रमुख केन्द्र बन गया है जहां से आफशोर आईटी सेवाओं में विश्व बाजार का 55 प्रतिशत जन-बल आउटसोर्स होता है तथा 35 प्रतिशत आईटीईएस/बीपीओ बाजार सृजित होता है।
घेरलू तथा निर्यात क्षेत्रों सहित भारतीय आईटी-बीपीओ क्षेत्र दिन-प्रति-दिन सबल होता जा रहा है तथा देश व विदेश में इसके क्रियाकलापों के नए-नए स्तर देखने को मिल रहे हैं। कंपनियां निरंतर अपने ग्राहकों को अनुसंधान एवं विश्लेषणात्मक सेवाएं प्रदान कर रही हैं। वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी एवं बीपीओ उद्योगों में भारतीय नेतृत्व से निम्नलिखित लाभ हो रहे हैं।
भारत का 28 कम लागत वाले देशों के बीच आईटी एवं बीपीओ में लगभग 28 प्रतिशत का हिस्सा है। इसमें तेजी से विकसित होता हुआ शहरी बुनियादी ढांचा सम्मिलित है जहां देश के अनेक आईटी केन्द्र फल-फूल रहे हैं। देश में तटवर्ती सेवा केंंद्र चल रहे हैं जो कम लागत पर उत्कृष्ट सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं, गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं और व्यापार संबंधी अनुकूल वातावरण सृजित कर रहे हैं। अनुकूल नीति संबंधी हस्तक्षेपों से सशक्त बुनियादी ढांचा निर्मित हुआ है तथा सरकार को व्यापक निपुणता सम्पन्न जन शक्ति उपलब्धद हुई है जिससे विदेशों में भारत की 'ब्रॉड इमेज' में बहुत आधिक सुधार हुआ है।
सूचना प्रौद्योगिकी विभाग रणनीतिक क्रियाकलापों का समन्वयन कर रहा है, निपुणता विकास संबंधी कार्यक्रमों को बढ़ावा दे रहा है, अवसंरचना संबंधी क्षमताओं को बढ़ा रहा है तथा आईटी एवं आईटीईएस के क्षेत्र में भारत को नेतृत्व करने की स्थिति अर्थात अग्रणी बनाने के लिए अनुसंधान एवं विकास को भी सहायता प्रदान कर रहा है।
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